अन्दर की आवाज़
Posted by ABDUL MAJID
जीवन में कई छीपी हूई ताकतें हें जिनका पता लगाना मुस्किल हे। ईसके लिए सिर्फ जिवन जीना पड़ता है।
जब भी हम दिल की ईरादो को मजबूत करते हें सपने को सच करने की कोशीश करते हें जब हम अपनी जीवन की अंधेरो को देेख कर हम जब उजालो की तरफ
झांक कर देखते हें ।
जब हम कूछ बड़ा करने की सोचते हें
जब हम रोज मर्रा की जींदगी से तंग दस्ती की आलम से उपर उठने की कोशीश करते हें हम अपने जीवन को बदलने की कोशीश करते हें ।
तो हमें कोई न कोई जरूर रोकता हे
हमें खींचा जाता हे ।
हमे कमजोर करने की कोशीश करते हें
हमें आगे बढ़ने नहीं देते
ईसलिए हमें किसी का कुछ नहीं सूनना हेे
अपने दिल की सूनो
जिस दिन हम ठान लेतेे हेे आगे बढ़ने की उस दिन हमें को नहीं रोक सकता
....................
लोग परेशान ईसलिए नहीं होते कि मेरा घर नहीं बन रहा हे ।
लोग परेशान ईसलिए होतें हें कि उसका घर केसे बन रहा हे ।
..................
क्या आप कामयाब होना चाहते हें
तो Imposible नाम की चीज को अपने शब्दकोश से उठा कर फेंक दो ना मूमकीन (Imposible ) नाम की कोई चीज नहीं होती ।
I - में
M - हूँ
P
O
S
I
B
L
E
जीतना हम किसी चीज को मूस्किल समझते हेें उतना मूस्किल होता जाता हे ।
जितना हम किसी चीज को आसान समझते हें उतना आसान होता जाता हे ।
क्योंकी जब हम मूस्किल सोचते हें तो
मन में जो विचार (Thouts) चल रहा होता हे वो भी सिग्नल मूस्किल का ही देता हें । यानी जब हम सोचते हे ये काम मूस्किल हे हम नहीं कर पायेंगे तो तुरंत हमारे अंदर से आवाज़ आती है हाँ यार हम नहीं कर पायेंगे मूश्किल हे
मूश्किल हेे।
मूश्किल हे ।
मूश्किल हे ।
एसे ही जब हम किसी काम को आसान समझने लगते हें एसे अंदर से आवाज़ आता हेे
आसान हे ।
आसान हे ।
आसान हे ।
कोई काम मूश्किल नहीं होता हेे सिर्फ मूश्किल लगता हे ।
झांक कर देखते हें ।
जब हम कूछ बड़ा करने की सोचते हें
जब हम रोज मर्रा की जींदगी से तंग दस्ती की आलम से उपर उठने की कोशीश करते हें हम अपने जीवन को बदलने की कोशीश करते हें ।
तो हमें कोई न कोई जरूर रोकता हे
हमें खींचा जाता हे ।
हमे कमजोर करने की कोशीश करते हें
हमें आगे बढ़ने नहीं देते
ईसलिए हमें किसी का कुछ नहीं सूनना हेे
अपने दिल की सूनो
जिस दिन हम ठान लेतेे हेे आगे बढ़ने की उस दिन हमें को नहीं रोक सकता
....................
लोग परेशान ईसलिए नहीं होते कि मेरा घर नहीं बन रहा हे ।
लोग परेशान ईसलिए होतें हें कि उसका घर केसे बन रहा हे ।
..................
क्या आप कामयाब होना चाहते हें
तो Imposible नाम की चीज को अपने शब्दकोश से उठा कर फेंक दो ना मूमकीन (Imposible ) नाम की कोई चीज नहीं होती ।
I - में
M - हूँ
P
O
S
I
B
L
E
जीतना हम किसी चीज को मूस्किल समझते हेें उतना मूस्किल होता जाता हे ।
जितना हम किसी चीज को आसान समझते हें उतना आसान होता जाता हे ।
क्योंकी जब हम मूस्किल सोचते हें तो
मन में जो विचार (Thouts) चल रहा होता हे वो भी सिग्नल मूस्किल का ही देता हें । यानी जब हम सोचते हे ये काम मूस्किल हे हम नहीं कर पायेंगे तो तुरंत हमारे अंदर से आवाज़ आती है हाँ यार हम नहीं कर पायेंगे मूश्किल हे
मूश्किल हेे।
मूश्किल हे ।
मूश्किल हे ।
एसे ही जब हम किसी काम को आसान समझने लगते हें एसे अंदर से आवाज़ आता हेे
आसान हे ।
आसान हे ।
आसान हे ।
कोई काम मूश्किल नहीं होता हेे सिर्फ मूश्किल लगता हे ।
No comments:
Post a Comment